स्वास का विज्ञान
स्वास का विज्ञान स्वास का विज्ञान समझने के लिए आपको योग को समझना होगा। योग का हर स्टेप शरीर के अंगों को दुरुस्त करने के साथ ही अन्तर्मुखी अध्यात्म की ओर का रास्ता खोलता है, और हर स्टेप के साथ स्वास लेने और छोड़ने का विज्ञान जुड़ा हुआ है। जो अपने स्वास के प्रति जितना सजग है, वो जीवन के हर पहलुओं को उतने ही बेहतर तरीके से जी रहा है। स्वास के प्रति सजग होने से तात्पर्य स्वास के आवागमन पर ध्यान देना है। आप सांस ले रहे, छोड़ रहे। यह प्रक्रिया आपके जन्म से ही शुरू हो जाती है, और जिस पल सांस अंदर गयी बाहर नही निकली, या बाहर गयी अंदर नही आयी फिर व्यक्ति को मृत मान लिया जाएगा। प्राण का संचार ही स्वास है। आप अपने स्वास के आवगमन पर जितना बेहतर तरीके से ध्यान रख पाए आप उतना ही बेहतर समझते जाएंगे। आगे का आयाम खुद ब खुद खुलता जाएगा।